
अब तक आपने मेरी जवानी की चुदाई कहानी का रस कुछ इस तरह से लिया था कि उदय सर के गांव जाने के बाद मैं चुत की चुनचुनी से परेशान हो गई थी. मुझे हर हाल में लंड चाहिए था. इसके लिए मुझे प्रिंसीपल सर का लंड मिल गया था.
उनके ऑफिस में मैंने टेबल के नीचे घुस कर उनका लंड चूसा था. लंड के रस को पी कर उन्हें अपनी चुत चोदने के लिए सैट कर लिया था.
उस दिन तो मैं अपने घर चली गई थी, लेकिन मुझे उनका लंड मिलना पक्का हो गया था.
अब आगे:
अब अगले दिन मैं उनके ऑफिस में फिर से गई. आज उन्होंने मुझसे बोला कि दरवाज़े की कुंडी लगा दो और इधर आ जाओ.
मैंने दरवाजे की कुण्डी लगा दी और उनकी तरफ घूम गई. वो मुझे चोदने के लिए उठ गए और मेरे करीब आकर मेरे रसीले होंठों को चूमने लगे. सर अपने दोनों हाथों से मेरी चुचियों को दबाने लगे.










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