जंगल में भाई से पहले चूत और फिर गांड मराई

(Xxx Bahan Chudai Kahani)

~Anjaan

Xxx बहन चुदाई कहानी में मैं सेक्सी माल हूँ और मेरी भाई भी बांका जवान है. हम गांव में रहते हैं. एक दिन हम भाई बहन जंगल गए. वहां मैं झरने में नहाने लगी. भाई देख रहा था.

मेरा नाम रानी है। मैं गाँव की रहने वाली हूँ 22 साल की, और लोग कहते हैं कि मेरा बदन ऐसा है कि मर्दों की साँसें थम जाएँ।

गोरा रंग, लंबे काले बाल, और कमर का वो लचकना, जो किसी को भी पागल कर दे।

लेकिन जो मैं आज बहन चुदाई कहानी बताने जा रही हूँ, वो मेरे दिल की एक गहरी बात है … एक ऐसी रात, जब मैं जंगल में थी, और वहाँ मेरे सगे भाई, अरबाज, के साथ जो हुआ, वो मेरे लिए जन्नत बन गया।

अरबाज मुझसे 2 साल बड़ा है … 24 साल का, गाँव का मस्तमौला लड़का।

मज़बूत बदन, चौड़ा सीना, और आँखों में एक शरारत।

हम भाई-बहन थे, लेकिन बचपन से हमारी नज़दीकी कुछ ज़्यादा ही थी।

हम एक-दूसरे से सब कुछ शेयर करते थे और कई बार उसकी नज़रें मेरे बदन पर रुक जाती थीं।

मैं भी उसे देखके अंदर से सिहर जाती थी, पर कभी कुछ कहा नहीं।

लेकिन उस रात जंगल में सब कुछ बदल गया।

मैं जंगल में जड़ी-बूटियाँ ढूँढने गई थी।

रात का समय था, चाँदनी बिखरी हुई थी, और जंगल की हवा में एक अजीब सी मस्ती थी।

मैंने नीली साड़ी पहनी थी, और मेरा पल्लू हवा में लहरा रहा था।

जंगल में चलते-चलते मैं एक झरने के पास पहुँच गई।

वहाँ पानी की आवाज़ और चाँद की रोशनी ने मेरा मन मोह लिया।

मैंने सोचा, क्यों ना थोड़ा पानी में डुबकी लगा लूँ?

मैंने अपनी साड़ी उतारी और सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में झरने के पास खड़ी हो गई।

पानी ठंडा था, लेकिन मेरा बदन गर्म हो रहा था।

तभी मुझे लगा कि कोई मुझे देख रहा है।

मैंने पलटकर देखा तो अरबाज वहाँ खड़ा था।

उसने सिर्फ़ एक लुंगी पहनी थी, और उसका मज़बूत बदन चाँदनी में चमक रहा था।

“अरबाज, भोसड़ी के,” मैंने चिल्लाकर कहा, “यहाँ क्या कर रहा है, साले? मुझे ताड़ रहा है क्या?”

अरबाज हँसा और बोला, “रानी, रंडी, तू यहाँ अकेले नहा रही है, और मैं तुझे ना देखूँ? तेरा बदन तो चाँद से भी ज़्यादा चमक रहा है, साली! मेरा लंड तो खड़ा हो गया तुझे देखके!”

मैं शरमाई, लेकिन मेरे अंदर भी एक आग सुलगने लगी।

मैंने कहा, “अरे मादरचोद, मैं तेरी बहन हूँ। ये क्या बोल रहा है, हरामी?”

अरबाज पास आया और मेरी कमर पकड़ ली।

उसने मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरी आँखों में देखते हुए कहा, “रानी, बहन तो तू है, पर तेरा ये बदन मुझे पागल कर देता है। बचपन से मैं तुझे देखता हूँ, और आज रात को मैं खुद को रोक नहीं सकता, साली!”

मैं सिहर गई।

मेरे दिल में एक अजीब सी बेचैनी थी।

मैंने कहा, “अरबाज, ये गलत है, साले। हम भाई-बहन हैं।”

लेकिन मेरी साँसें तेज़ हो रही थीं, और मेरा बदन उसकी बातों से सुलग रहा था।

अरबाज ने मेरी गर्दन पर एक चुम्बन दे दिया।

मेरी साँसें रुक गईं।

मैंने कहा, “मादरचोद, ये क्या कर रहा है? मेरे बदन को सुलगा देगा क्या, साले?”

अरबाज ने मेरे ब्लाउज़ के हुक खोल दिए और मेरे चूचों को आज़ाद कर दिया।

मेरे चूचे चाँदनी में चमक रहे थे और अरबाज की आँखें चमक उठीं।

उसने कहा, “भोसड़ी की, तेरे चूचे तो मस्त हैं, साली! इन्हें चूस-चूस के लाल कर दूँगा!”

मैंने अरबाज को कसके पकड़ा और बोली, “चूस ले, हरामी। मेरे चूचों को मसल दे साले! आज रात को मेरे बदन की हर हद को पार कर दे!”

अरबाज ने मेरे चूचों को अपने मुँह में लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा।

मैं सिसकारियाँ लेने लगी, “मादरचोद, कितना मज़ा दे रहा है! और ज़ोर से चूस, साले!”

अरबाज ने मेरे निप्पल्स को हल्के से काटा.

और मेरा बदन सिहर उठा, मैंने कहा, “साले, मेरे चूचों को लाल कर दे। आज रात को मुझे पागल कर दे!”

अरबाज ने मेरा पेटीकोट उतार दिया और मैं पूरी तरह नंगी हो गई।

मेरा गोरा बदन चाँदनी में नहा रहा था और अरबाज की नज़रें मेरी चूत पर टिक गईं।

उसने कहा, “रानी, रंडी, तेरी चूत तो रसीली लग रही है; आज रात को मैं इसे चोद-चोद के फाड़ दूँगा!”

मैंने अरबाज की लुंगी उतार दी और उसका लंड देखके चीखी, “भोसड़ी के, तेरा लंड तो मोटा साँड जैसा है! डाल दे साले, मेरी चूत को ठोक दे!”

अरबाज ने मुझे झरने के किनारे एक पत्थर पर लिटा दिया।

उसने मेरी जाँघें चौड़ी कीं और मेरी चूत को हल्के से सहलाया।

मैं सिसकारियाँ लेने लगी, “मादरचोद, जल्दी डाल, साले! मेरी चूत तरस रही है!”

अरबाज ने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और एक ज़ोरदार झटका मारा।

मैं चीखी, “हरामी, कितना मोटा है तेरा! पेल दे ज़ोर से, मेरी चूत को चोद-चोद के मज़ा दे!”

अरबाज ने मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया।

मैं चिल्ला रही थी, “भोसड़ी के, और ज़ोर से पेल! मेरी चूत को फाड़ दे, साले!”

अरबाज ने मुझे पत्थर से उठाया और जंगल की एक गुफा की ओर ले गया।

गुफा के अंदर चाँदनी की हल्की रोशनी आ रही थी और माहौल कामुक हो गया था।

अरबाज ने मुझे गुफा की दीवार से सटा दिया और फिर से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया।

मैं चीखी, “मादरचोद, कितना मज़ा दे रहा है! और ज़ोर से चोद, मेरी चूत को सूजा दे!”

अरबाज ने मेरे चूचों को मसला और बोला, “रंडी, तेरी चूत तो गर्म भट्टी है। मेरा लंड पिघल जाएगा, साली!”

मैंने अरबाज को नीचे गिराया और उसके ऊपर चढ़ गई।

मैंने उसका लंड पकड़ा और अपनी चूत में डाल लिया।

मैं ऊपर-नीचे होने लगी और मेरी चीखें गुफा में गूँजने लगीं, “मादरचोद, कितना मज़ा आ रहा है! तेरे लंड ने मेरी चूत को जन्नत दिखा दी!”

अरबाज ने मेरी कमर पकड़ी और बोला, “चल रंडी, ठोक दे। मेरे लंड को मज़ा दे दे, साली!”

अरबाज ने मुझे उल्टा किया और मेरी गांड को सहलाया।

उसने कहा, “रानी, रंडी, तेरी गांड तो मस्त है। इसे भी ठोक दूँ क्या?”

मैं हँसी और बोली, “अबे मादरचोद, पहले मेरी चूत को तो चोद ले। गांड बाद में ठोकना, साले!”

अरबाज ने मेरी गांड पर एक चपत मारी और फिर से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया।

मैं चीखी, “भोसड़ी के, और ज़ोर से पेल! मेरी चूत को चोद-चोद के मज़ा दे, साले!”

रात गहरी हो गई, और हमारी चुदाई का खेल चलता रहा।

अरबाज ने मुझे कई बार चोदा … कभी गुफा की दीवार से सटाकर, कभी फर्श पर लिटाकर, और कभी झरने के किनारे ले जाकर।

मैं हर बार चीखती, “मादरचोद, और ज़ोर से पेल! मेरी चूत को सूजा दे, साले!” और अरबाज चिल्लाता, “रंडी, तेरी चूत तो मस्त है। ले मेरा लंड, और ले, साली!”

रात के 3 बज चुके थे।

मैंने अरबाज को अपनी तरफ खींचा और बोली, “मादरचोद, मैं झड़ने वाली हूँ। और ज़ोर से पेल, साले!”

अरबाज ने मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदा.

और मैं चीखी, “भोसड़ी के, मैं झड़ गई! कितना मज़ा आया, साले!”

अरबाज भी चिल्लाया, “रंडी, मैं भी झड़ रहा हूँ। ले मेरा माल, साली!”

हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में गिर गए।

मैं और अरबाज नंगे गुफा के फर्श पर पड़े थे, और हमारी साँसें अभी भी तेज़ थीं।

मैंने अरबाज को चूमा और बोली, “हरामी, तूने तो मेरी चूत को सुजा दिया। कितना मज़ा आया!”

अरबाज हँसा और बोला, “रानी, रंडी, मज़ा तो मोटी चूत में ही है। अब हर रात को जंगल में तुझे चोदूँगा, साली!”

सुबह हुई तो हम जंगल से बाहर निकले।

मेरी साड़ी फटी हुई थी, और अरबाज की लुंगी कहीं खो गई थी।

बहन चुदाई करने के बाद हम गाँव की ओर चल पड़े।

उस रात जंगल में अरबाज के साथ जो हुआ, वो मेरे लिए एक सपना बन गया था।

अरबाज मेरा भाई था, और हमने जो किया, वो गलत था।

लेकिन उसकी बाहों में जो सुकून मिला, वो मैं भूल नहीं पा रही थी।

मेरी चूत अभी भी उस रात की गर्मी को याद करके सुलग उठती थी।

अब मेरे दिल में एक नई ख्वाहिश जाग रही थी … मैं चाहती थी कि अरबाज मेरी गांड मारे।

ये सोचकर ही मेरा बदन सिहर जाता था, और मैं रातों को करवटें बदलती रहती थी।

अरबाज भी मुझसे नज़रें नहीं मिला पा रहा था।

गाँव में हम एक ही घर में रहते थे … अम्मी, अब्बू, और हम दोनों।

उस रात के बाद हम दोनों के बीच एक अजीब सा तनाव था।

मैं उसकी आँखों में वही आग देखती थी, जो जंगल में देखी थी।

और मुझे पता था, वो भी मेरे बदन को याद करके तड़प रहा था।

लेकिन फैमिली के सामने तो हम भाई-बहन थे … कैसे अपनी ख्वाहिश को पूरा करते?

एक दिन अम्मी और अब्बू को पड़ोस के गाँव में एक शादी में जाना था।

वो बोले, “रानी, अरबाज, हम रात तक लौटेंगे। घर का ध्यान रखना।”

अम्मी के जाते ही मेरा दिल धड़कने लगा।

मैंने सोचा, आज मौका है। मैं अरबाज से अपनी गांड मरवा लूँगी।

लेकिन डर भी लग रहा था … अगर किसी को पता चल गया तो?

फिर भी, मेरी ख्वाहिश मेरे डर से बड़ी थी।

मैंने अरबाज को देखा।

वो आँगन में बैठा था, और उसकी नज़रें मुझ पर टिकी थीं।

मैंने हिम्मत करके कहा, “अरबाज, आज अम्मी-अब्बू नहीं हैं। जंगल चलें? मुझे कुछ जड़ी-बूटियाँ ढूँढनी हैं।”

अरबाज समझ गया कि मैं क्या चाहती हूँ।

उसने आँख मारते हुए कहा, “चल रानी, रंडी, जंगल में मज़ा करेंगे। तेरी चूत तो मैंने ठोक दी, अब क्या चाहती है, साली?”

मैं शरमाई और बोली, “साले, आज मेरी गांड मार दे। मेरी चूत तो सूज गई, अब गांड की बारी है, मादरचोद!”

अरबाज की आँखें चमक उठीं।

हम दोनों चुपके से घर से निकल गए।

रास्ते में मैं बार-बार पीछे मुड़कर देख रही थी … कहीं कोई गाँव वाला ना देख ले।

अरबाज ने मेरा हाथ पकड़ा और बोला, “डर मत, रानी। आज रात को मैं तुझे जन्नत दिखाऊँगा, साली!”

उसकी बात सुनके मेरा डर तो कम हुआ लेकिन दिल की धड़कन और तेज़ हो गई।

जंगल में पहुँचते ही हम उस गुफा में गए, जहाँ पिछली बार हमने चुदाई की थी।

चाँदनी फिर से बिखरी हुई थी, और हवा में वही मस्ती थी।

मैंने अपनी साड़ी उतार दी और सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में अरबाज के सामने खड़ी हो गई।

मेरा गोरा बदन चाँदनी में चमक रहा था, और अरबाज की नज़रें मेरे चूचों पर टिक गईं।

उसने कहा, “भोसड़ी की, रानी, तेरा बदन तो आग है। आज रात को मैं तेरी गांड मार-मार के तुझे रुला दूँगा, साली!”

मैंने अरबाज की लुंगी उतार दी।

उसका लंड पहले से खड़ा था.

उसे देखके मेरा दिल धड़कने लगा।

मैंने कहा, “अरबाज, मादरचोद, तेरा लंड तो मोटा है। मेरी गांड में डालेगा तो दर्द होगा, साले!”

अरबाज हँसा और बोला, “रंडी, दर्द में ही मज़ा है। तू बस मेरा लंड ले ले, मैं तुझे मज़ा दूँगा!”

उसने मुझे गुफा की दीवार से सटा दिया और मेरे ब्लाउज़ के हुक खोल दिए।

मेरे चूचे आज़ाद हो गए और अरबाज ने उन्हें ज़ोर-ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया।

मैं सिसकारियाँ लेने लगी, “मादरचोद, कितना मज़ा दे रहा है! मेरे चूचों को लाल कर दे, साले!”

अरबाज ने मेरे निप्पल्स को काटा, मेरा बदन सिहर उठा।

मैंने कहा, “हरामी, अब मेरी गांड मार! मेरी चूत तो तूने ठोक दी, अब गांड की बारी है!”

अरबाज ने मेरा पेटीकोट उतार दिया, और मैं पूरी तरह नंगी हो गई।

उसने मुझे उल्टा किया और मेरी गांड को सहलाने लगा।

मेरी गांड चाँदनी में चमक रही थी, और अरबाज की साँसें तेज़ हो गईं।

उसने कहा, “रानी, रंडी, तेरी गांड तो मस्त है। आज रात को मैं इसे चोद-चोद के फाड़ दूँगा!”

मैं डर रही थी, लेकिन मेरी ख्वाहिश मेरे डर से बड़ी थी।

मैंने कहा, “मादरचोद, डाल दे। मेरी गांड को ठोक दे, साले!”

अरबाज ने अपने लंड पर थोड़ा सा तेल लगाया, जो वो अपने साथ लाया था और मेरी गांड के छेद पर रख दिया।

उसने हल्के से धक्का मारा, और मैं चीखी, “भोसड़ी के, कितना दर्द हो रहा है! साले, धीरे कर!”

अरबाज ने मेरी कमर पकड़ी और बोला, “रंडी, थोड़ा दर्द सह ले। मज़ा बाद में आएगा, साली!”

उसने एक और झटका मारा, और उसका लंड मेरी गांड में पूरा घुस गया।

मैं चीखी, “मादरचोद, मेरी गांड फट गई! साले, कितना मोटा है तेरा लंड!”

लेकिन धीरे-धीरे दर्द कम हुआ, और एक अजीब सा मज़ा आने लगा।

अरबाज ने मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया।

मेरी गांड में उसका लंड अंदर-बाहर हो रहा था और मैं सिसकारियाँ ले रही थी, “मादरचोद, कितना मज़ा आ रहा है! और ज़ोर से पेल, मेरी गांड को फाड़ दे, साले!”

अरबाज ने मेरी गांड पर एक चपत मारी और बोला, “रंडी, तेरी गांड तो टाइट है। मेरा लंड तो पिघल जाएगा, साली!”

हम दोनों की साँसें तेज़ थीं, और गुफा में मेरी चीखें गूँज रही थीं।

अरबाज ने मुझे गुफा के फर्श पर लिटा दिया और मेरी टाँगें ऊपर उठा दीं।

उसने फिर से मेरी गांड में अपना लंड डाल दिया और ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा।

मैं चिल्ला रही थी, “भोसड़ी के, और ज़ोर से पेल! मेरी गांड को सूजा दे, साले!”

अरबाज ने मेरे चूचों को मसला और बोला, “रंडी, तेरी गांड तो मस्त है। ले मेरा लंड, और ले, साली!”

मेरा बदन सिहर रहा था, और मुझे एक अजीब सा सुकून मिल रहा था।

तभी हमें बाहर से कुछ आवाज़ें सुनाई दीं।

मैं डर गई और बोली, “अरबाज, मादरचोद, कोई आ रहा है! रुक जा, साले!”

अरबाज ने मुझे चुप कराया और बोला, “चुप रह, रंडी। ये जंगल के जानवर होंगे। तू मज़ा ले, साली!”

लेकिन मैं डर रही थी।

मैंने कहा, “अगर अम्मी-अब्बू आ गए तो? हमारी गांड फट जाएगी, हरामी!”

अरबाज हँसा और बोला, “रानी, अभी तो मैं तेरी गांड मार रहा हूँ। अम्मी-अब्बू की बाद में सोचेंगे!”

आवाज़ें दूर चली गईं और हम फिर से अपनी मस्ती में खो गए।

अरबाज ने मुझे जंगल के एक पेड़ के नीचे ले जाकर फिर से मेरी गांड मारी।

मैं चीखी, “मादरचोद, कितना मज़ा दे रहा है! और ज़ोर से पेल, साले!”

अरबाज ने मेरी गांड को चोद-चोद के लाल कर दिया।

मैंने कहा, “हरामी, मैं झड़ने वाली हूँ। और ज़ोर से पेल!”

अरबाज ने मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदा, और मैं चीखी, “भोसड़ी के, मैं झड़ गई! कितना मज़ा आया, साले!”

अरबाज भी चिल्लाया, “रंडी, मैं भी झड़ रहा हूँ। ले मेरा माल, साली!”

हम दोनों एक-दूसरे की बाहों में गिर गए।

मेरा बदन दर्द से भरा था, लेकिन दिल में एक अजीब सा सुकून था।

मैंने अरबाज को चूमा और बोली, “मादरचोद, तूने तो मेरी गांड फाड़ दी। लेकिन कितना मज़ा आया!”

अरबाज हँसा और बोला, “रानी, रंडी, मज़ा तो टाइट गांड में ही है। अब हर रात को तुझे जंगल में लाकर चोदूँगा, साली!”

सुबह होने वाली थी।

हमने जल्दी से अपने कपड़े पहने और गाँव की ओर चल पड़े।

रास्ते में मैं बार-बार पीछे मुड़कर देख रही थी … कहीं कोई गाँव वाला ना देख ले।

घर पहुँचते ही हमने अपने कपड़े बदले और अलग-अलग कमरों में चले गए।

अम्मी-अब्बू सुबह लौट आए और हमें देखके बोले, “रानी, अरबाज, रात को क्या कर रहे थे?”

मैंने डरते हुए कहा, “अम्मी, कुछ नहीं, बस सो रहे थे।”

अरबाज ने आँख मारते हुए कहा, “हाँ अम्मी, रानी को नींद नहीं आ रही थी, तो मैंने उसे सुला दिया।”

अम्मी हँस पड़ी, लेकिन मुझे और अरबाज को पता था कि हमने क्या किया।

उस रात की मस्ती मेरे दिल में बस गई थी।

मैं जानती थी कि ये गलत था, लेकिन अरबाज की बाहों में जो मज़ा मिला, वो मैं कभी नहीं भूल सकती।

अब हम दोनों चुपके-चुपके जंगल जाते हैं, और अपनी ख्वाहिशों को पूरा करते हैं … फैमिली से छुपते-छुपाते, मस्ती करते-करते।

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