
अब तक इस टीचर सेक्स स्टोरी में आपने पढ़ा था कि मेरी चुदाई की इच्छा बलवती हो गई थी. उदय सर मेरी गांड को सूंघ चाट कर मुझे और भी मदहोश किये जा रहे थे.
अब आगे:
सर मेरी गांड में अपनी थूक से भरी जीभ डाल कर अन्दर बाहर करने लगे और अपने दोनों हाथों से मेरी गांड को नोंचने और मसलने लगे.
कुछ देर तक बहुत बढ़िया से मेरी गांड का रस पीने के बाद वो सीधे हुए और मुझे अपनी तरफ घुमा दिया.
मैं उनके सामने सिर्फ ब्रा में खड़ी थी. सर ने मेरे सिर को पकड़ा और मेरे होंठों को अपने होंठों से चिपका लिया. सर मेरे रसभरे कुंवारे होंठों को खूब ज़ोर ज़ोर से चूसने लगे. मुझे भी बेहद मजा आने लगा था.
फिर उन्होंने मुझसे जीभ बाहर निकालने का बोला. मैंने अपनी जीभ बाहर की, तो वो मेरी जीभ को भी अपने मुँह में लेकर चूसने लगे.










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